छोटे परदे पर ‘बालिका वधु’ में आनंदी के नाम से मशहूर हुईं प्रत्यूषा बनर्जी…
शोले के ये किरदार को देखकर हो जायेंगे आप हैरान ….
विजू का बॉलीवुड सफर
उनके चेहरे पर बुढापे का असर दूर से ही देखा जा सकता है । इनके बाल भी काफी सफेद हो गए है और अगर प्राय इन्हें गब्बर के कलिआ से इनकी तुलना करेंगे तो पहचान पाना बड़ा ही मुश्किल होगा ।

कलिआ रहा सबसे यादगार
उन्होंने अपने करियर के दोरान काफी फिल्मी में भी काम लिया है जिनमे हिंदी के अलावा मराठी फिल्में भी शामिल थी और इन फिल्मी में हर किरदार उन्होंने बडी ही मेहनत के साथ निभाया जिसके लिए उन्हें आज भी सराहा जाता है |अभिनेता वीजूखोटे ने भले ही फिल्म में मुख्य अभिनेता के तोर पर काम न लिया हो पर उन्होंने जितनी भी फिल्में की है उनमें वीजू के बोम्ब अंदाज को लोगो ने खूब पसंद लिया।

Source: Bollywoodpapa
शोले के ये किरदार को देखकर हो जायेंगे आप हैरान…: वो 10 अनसुने किस्से जो बॉलीवुड के सबसे बड़े क्लासिक को बनाते हैं अमर!
भारतीय सिनेमा के इतिहास में अगर किसी एक फिल्म को ‘महाकाव्य’ (Epic) का दर्जा दिया जाता है, तो वो है रमेश सिप्पी द्वारा निर्देशित 1975 की कालजयी फिल्म ‘शोले’ (Sholay). 15 अगस्त 1975 को रिलीज़ हुई इस फिल्म ने न सिर्फ़ बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, बल्कि इसने किरदारों को अमर बना दिया. क्या जय, क्या वीरू, क्या बसंती और क्या गब्बर… हर किरदार एक कहानी है.
लेकिन, क्या आप जानते हैं कि पर्दे पर दिखने वाले इन शानदार किरदारों के पीछे भी कई ऐसे हैरान कर देने वाले किस्से छिपे हैं, जिन्हें जानकर आप वाकई चौंक जाएंगे? जिस अभिनेता को ‘गब्बर’ के लिए ख़ारिज किया जा रहा था, वह आज भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा विलेन बन गया. जिस हीरो को एक रोल चाहिए था, उसने अपनी प्रेमिका के लिए दूसरा रोल ले लिया.
आइए, आज इस सफ़र पर चलते हैं और ‘शोले’ के उन किरदारों और उनसे जुड़े अनसुने तथ्यों को जानते हैं, जिन्हें देखकर आप हैरान हो जाएंगे और आपको इस क्लासिक से और भी ज़्यादा प्यार हो जाएगा।
1. गब्बर सिंह: जिसे उसकी ‘आवाज़’ के लिए ख़ारिज किया जा रहा था
गब्बर सिंह (Gabbar Singh) का किरदार, जिसे अमजद खान ने निभाया, भारतीय सिनेमा के इतिहास का सबसे प्रतिष्ठित विलेन है। उसकी क्रूर हंसी, डायलॉग और वहशीपन आज भी लोगों को रोमांचित करता है। लेकिन, अमजद खान की कास्टिंग अपने आप में एक हैरान कर देने वाला किस्सा है।
- पहले डैनी की पसंद: गब्बर सिंह के रोल के लिए अमजद खान पहली पसंद नहीं थे। इस किरदार के लिए सबसे पहले अभिनेता डैनी डेन्जोंगपा को संपर्क किया गया था, लेकिन डेट्स न होने के कारण उन्हें यह रोल छोड़ना पड़ा।
- आवाज़ पर शक: जब अमजद खान को फाइनल किया गया, तो पटकथा लेखक जोड़ी सलीम-जावेद (Salim-Javed) को उनकी आवाज़ पर संदेह था। उन्हें लगा कि गब्बर के खूंखार किरदार के लिए उनकी आवाज़ बहुत धीमी और कमज़ोर है। यह रमेश सिप्पी का दृढ़ विश्वास था कि अमजद खान ही इस किरदार को निभाएंगे।
- असल ज़िंदगी का डाकू: गब्बर सिंह का किरदार सिर्फ़ कल्पना नहीं था। इसे 1950 के दशक में ग्वालियर के आसपास सक्रिय एक असली डाकू गब्बर सिंह से प्रेरित बताया जाता है, जो पुलिसकर्मियों के कान और नाक काट देता था।
- सिर्फ़ 9 सीन का कमाल: यकीन करना मुश्किल है, लेकिन इतना बड़ा प्रभाव छोड़ने वाला यह किरदार, पूरी फ़िल्म में सिर्फ़ नौ (9) सीन्स में ही दिखाई देता है।
- गब्बर का बिस्किट कमर्शियल: फ़िल्म की अपार सफ़लता के बाद, अमजद खान ने गब्बर सिंह के रूप में ‘ब्रिटानिया ग्लूकोस डी बिस्किट’ का विज्ञापन किया था। यह पहली बार था जब किसी खलनायक के किरदार को किसी उत्पाद को प्रचारित करने के लिए इस्तेमाल किया गया, और यह विज्ञापन ज़बरदस्त हिट हुआ।
2. जय और वीरू: दोस्ती के नाम जो दोस्ती से निकले
जय (अमिताभ बच्चन) और वीरू (धर्मेंद्र) की जोड़ी हिंदी सिनेमा में दोस्ती का पर्याय बन गई। फ़िल्म का गाना ‘ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे’ आज भी हर दोस्त की जुबां पर है। इस महान दोस्ती के किरदारों के पीछे भी कई रोचक बातें हैं।
- असली दोस्तों के नाम: जय और वीरू का नाम सिर्फ़ काल्पनिक नहीं थे। पटकथा लेखक सलीम खान ने ये नाम अपने कॉलेज के दो दोस्तों, वीरेंदर सिंह ब्यास और जय सिंह राव कलेवर के नाम पर रखे थे।
- जय के लिए पहली पसंद: अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) को ‘जय’ का रोल मिलने से पहले, यह रोल अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा को ऑफर किया गया था। सिप्पी साहब भी सिन्हा को चाहते थे, लेकिन सलीम-जावेद ने अमिताभ बच्चन की ज़बरदस्त लॉबिंग की। रमेश सिप्पी ने उनकी फ़िल्म ज़ंजीर (Zanjeer) देखने के बाद हामी भरी।
- अमिताभ भी बनना चाहते थे गब्बर: हैरान करने वाली बात यह है कि अमिताभ बच्चन ने खुद रमेश सिप्पी से गब्बर सिंह का किरदार निभाने का अनुरोध किया था। हालांकि, फ़िल्म निर्माताओं को लगा कि वह हीरो के लिए अधिक उपयुक्त हैं।
- एक असल गोली का हादसा: फ़िल्म के क्लाइमेक्स सीन की शूटिंग के दौरान, कुछ शॉट्स के लिए असली गोलियों का इस्तेमाल किया गया था। एक दुर्घटना में, धर्मेंद्र द्वारा चलाई गई एक गोली कथित तौर पर अमिताभ बच्चन के पास से गुज़र गई थी, और वह बाल-बाल बचे थे।
3. वीरू और बसंती: कैमरे के पीछे का सच्चा रोमांस
धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने दर्शकों को दीवाना बना दिया था, लेकिन इसके पीछे की कहानी किसी फ़िल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है।
- वीरू के लिए रोल बदला: धर्मेंद्र (Dharmendra) शुरू में ठाकुर बलदेव सिंह का गंभीर रोल निभाना चाहते थे। उन्होंने अपना मन तब बदला जब उन्हें बताया गया कि अगर वह ठाकुर का रोल लेते हैं, तो संजीव कुमार (Sanjeev Kumar) को वीरू का रोल मिलेगा, और फिर उन्हें हेमा मालिनी के साथ रोमांस करने का मौका मिलेगा। धर्मेंद्र, जो उन दिनों हेमा मालिनी को पसंद करते थे और उनसे शादी करना चाहते थे, उन्होंने तुरंत वीरू का रोल स्वीकार कर लिया, क्योंकि संजीव कुमार भी हेमा मालिनी को प्रपोज़ कर चुके थे।
- रीटेक का ‘ड्रामा’: वीरू और बसंती के रोमांटिक दृश्यों के दौरान, धर्मेंद्र अक्सर लाइटिंग करने वाले क्रू मेंबर्स को पैसे देते थे, ताकि वे जानबूझकर शॉट को ख़राब कर दें। ऐसा इसलिए किया जाता था, ताकि उन्हें अपनी प्रेमिका हेमा मालिनी (Hema Malini) के साथ अधिक समय बिताने के लिए ज़्यादा रीटेक मिलें।
- बसंती को तांगेवाली बनने में थी हिचकिचाहट: हेमा मालिनी को पहले बसंती (Basanti) का किरदार निभाने में हिचकिचाहट हो रही थी क्योंकि वह एक तांगा चलाने वाली (tonga driver) का रोल नहीं करना चाहती थीं। रमेश सिप्पी ने उन्हें समझाया और उनकी बात मानी, और बाकी इतिहास है।
4. छोटे मगर ‘अमर’ किरदार: जो आज भी याद किए जाते हैं
शोले की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि इसके छोटे-छोटे किरदारों ने भी इतना बड़ा असर छोड़ा कि वे मुख्य किरदारों की तरह ही अमर हो गए।
संभा (Sambha)
- सिर्फ़ एक डायलॉग के लिए 27 बार सफ़र: डाकू गब्बर सिंह का दाहिना हाथ संभा, जिसका सिर्फ़ एक ही डायलॉग था, “पूरे पचास हज़ार” (पूरे पचास हज़ार), उसे निभाने वाले अभिनेता मैक मोहन को सिर्फ़ इस एक लाइन के लिए मुंबई से फ़िल्म की शूटिंग लोकेशन, रामनगर (बेंगलुरु के पास), 27 बार सफ़र करना पड़ा था।
कालिया (Kaalia)
- “तेरा क्या होगा कालिया”: यह डायलॉग बोलते ही गब्बर, कालिया को गोली मार देता है। इस किरदार को निभाने वाले अभिनेता विजू खोटे को उनके इस छोटे से मगर दमदार रोल के लिए आज भी याद किया जाता है। मैक मोहन और विजू खोटे दोनों को ही शोले के बाद अपने किरदारों के नाम से पहचाना जाने लगा, जो उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया।
सईद मिर्ज़ा (Ahmed)
- फीस में मिला फ्रिज: ‘शोले’ में मौलवी साहब (ए.के. हंगल) के बेटे अहमद का छोटा सा, लेकिन भावनात्मक रूप से महत्त्वपूर्ण किरदार अभिनेता सचिन पिलगाँवकर ने निभाया था। उन्होंने फ़िल्म के निर्देशक रमेश सिप्पी को अपना गुरु मानते हुए, रोल के लिए फीस लेने से मना कर दिया था। इसके बदले में सिप्पी ने उन्हें तोहफे के रूप में एक नया फ्रिज (रेफ्रिजरेटर) भेंट किया था।
जेलर (Jailor)
- “हम अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर हैं!”: यह डायलॉग सुनते ही असराणी (Asrani) का हिटलर-नुमा जेलर याद आ जाता है। रमेश सिप्पी ने असराणी को यह किरदार निभाने के लिए विशेष रूप से हिटलर की तस्वीरें और किताबें दी थीं, ताकि वह उस तरह की अथॉरिटी और हावभाव ला सकें।
सूरमा भोपाली (Soorma Bhopali)
- शूटिंग पूरी होने के बाद जोड़ा गया किरदार: जगदीप द्वारा निभाया गया मज़ेदार किरदार सूरमा भोपाली, जो फ़िल्म के सबसे यादगार कॉमिक रोल्स में से एक है, मूल स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं था। पटकथा लेखक सलीम-जावेद को लगा कि फ़िल्म में एक कॉमिक पंच की कमी है, इसलिए शूटिंग पूरी होने के बाद इस किरदार के दृश्यों को जोड़ा गया था।
मुश्ताक़ मर्चेंट का डबल रोल
- कम ही लोगों को पता होगा कि एक अभिनेता ने फ़िल्म में दो रोल निभाए थे। अभिनेता मुश्ताक़ मर्चेंट ने पहला रोल ट्रेन ड्राइवर का निभाया, जिसे डाकुओं की गोली लगती है, और दूसरा रोल उस पारसी आदमी का निभाया जिसकी मोटरसाइकिल जय और वीरू चुराते हैं।
5. राधा और मौसी: खामोशी और चतुराई का संतुलन
राधा (जया बच्चन) और बसंती की मौसी (लीला मिश्रा) दो ऐसे महिला किरदार थे, जिन्होंने कहानी को एक गहरा और हल्का दोनों रंग दिया।
- जया बच्चन की गर्भावस्था: फ़िल्म की शूटिंग शुरू होने से सिर्फ़ चार महीने पहले अमिताभ और जया की शादी हुई थी। फ़िल्म के दौरान जया बच्चन श्वेता बच्चन की माँ बनने वाली थीं, और उनकी गर्भावस्था के कारण कई बार शूटिंग में देरी हुई।
- 20 दिन में शूट हुआ एक सीन: राधा का वह भावनात्मक सीन, जहाँ वह रात में दिया जलाती हैं और जय (अमिताभ बच्चन) दूर बैठकर हारमोनियम बजाते हैं, उसे शाम की एकदम सही रोशनी (Sunset Lighting) में शूट करने के लिए लगभग 20 दिन लग गए थे।
- मौसी की हास्य-विनोदी प्रस्तुति: लीला मिश्रा (Leela Mishra) द्वारा निभाया गया बसंती की मौसी का किरदार, अपने ज़माने की एक आम लेकिन मज़बूत भारतीय महिला का प्रतिनिधित्व करता है, जो ‘आत्महत्या’ के नाटक के दौरान भी जय और वीरू के प्रस्ताव को चतुराई से ठुकरा देती है। यह सीन भी पटकथा लेखक सलीम खान की ज़िंदगी की एक असल घटना से प्रेरित था।
‘शोले’ केवल एक फिल्म नहीं है; यह एक सांस्कृतिक घटना है। यह उस दौर के हर छोटे-बड़े कलाकार की मेहनत, निर्देशक के विज़न और लेखकों की दूरदर्शिता का परिणाम है। इन अनसुने और हैरान कर देने वाले किस्सों को जानकर, इस फिल्म को देखने का अनुभव और भी ज़्यादा ख़ास हो जाता है।
AISEO-Friendly FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1: गब्बर सिंह का किरदार निभाने के लिए पहली पसंद कौन था?
Ans: गब्बर सिंह का किरदार निभाने के लिए पहली पसंद अभिनेता डैनी डेन्जोंगपा थे, लेकिन फ़िरोज़ खान की फ़िल्म ‘धर्मात्मा’ की शूटिंग में व्यस्त होने के कारण उन्हें यह रोल छोड़ना पड़ा, जिसके बाद अमजद खान को यह किरदार मिला।
Q2: क्या गब्बर सिंह का किरदार किसी वास्तविक व्यक्ति पर आधारित था?
Ans: हाँ, गब्बर सिंह का किरदार कथित तौर पर 1950 के दशक में ग्वालियर के आसपास सक्रिय एक असली डाकू गब्बर सिंह से प्रेरित था, जो अपनी क्रूरता के लिए कुख्यात था।
Q3: ‘शोले’ के किस अभिनेता ने फीस के बदले फ्रिज लिया था?
Ans: अभिनेता सचिन पिलगाँवकर, जिन्होंने मौलवी साहब के बेटे अहमद का किरदार निभाया था, उन्होंने अपनी फीस लेने से मना कर दिया था। इसके बदले में निर्देशक रमेश सिप्पी ने उन्हें तोहफे के रूप में एक फ्रिज (रेफ्रिजरेटर) दिया था।
Q4: जय और वीरू के नाम कहाँ से आए?
Ans: पटकथा लेखक सलीम खान ने जय (Jai) और वीरू (Veeru) के नाम अपने कॉलेज के दो दोस्तों, जय सिंह राव कलेवर और वीरेंदर सिंह ब्यास, के नाम पर रखे थे, जो उनकी असल ज़िंदगी के दोस्त थे।
Q5: ‘शोले’ में किस अभिनेता ने डबल रोल निभाया था?
Ans: अभिनेता मुश्ताक़ मर्चेंट ने फ़िल्म में दो छोटे रोल निभाए थे: पहला ट्रेन ड्राइवर का और दूसरा उस पारसी व्यक्ति का जिसकी मोटरसाइकिल जय और वीरू चुराते हैं।
शोले के ये किरदार को देखकर हो जायेंगे आप हैरान: 50 साल बाद कहाँ हैं ‘गब्बर’ के डाकू और ‘मौसी’?
‘शोले’ (Sholay) – यह सिर्फ एक फिल्म का नाम नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है। 15 अगस्त 1975 को रिलीज़ हुई इस फिल्म ने दोस्ती, प्यार, बदले और कॉमेडी की जो परिभाषा गढ़ी, वह आज 50 साल बाद भी उतनी ही ताज़ा और दमदार है।
फिल्म के मुख्य किरदार जय, वीरू, बसंती और गब्बर सिंह को तो हर कोई जानता है, लेकिन इस कल्ट क्लासिक को महान बनाने में छोटे-छोटे किरदारों का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है। क्या आप जानते हैं कि ‘गब्बर’ का किरदार निभाने वाला अभिनेता कौन था, जिसे शुरुआत में कास्ट करने से ही मना कर दिया गया था? या ‘बसन्ती की मौसी’ (Leela Mishra) का असली दर्द क्या था?
यह आर्टिकल आपको ‘शोले’ के उन किरदारों और कलाकारों की दुनिया में ले जाएगा, जिन्हें देखकर आप हैरान हो जाएंगे, उनके अनसुने किस्से जानेंगे और उनकी वर्तमान स्थिति से रूबरू होंगे।
1. मुख्य किरदारों की Casting के अनसुने रहस्य
फिल्म ‘शोले’ की कास्टिंग अपने आप में एक कहानी है, जिसमें कई बड़े सितारों की किस्मत दांव पर लगी थी। इन हैरान कर देने वाले फैसलों को जानकर आपको यकीन नहीं होगा:
क. जय (अमिताभ बच्चन)
- असली पसंद: शत्रुघ्न सिन्हा
- विश्वास करना मुश्किल है, लेकिन ‘जय’ के किरदार के लिए पहली पसंद अमिताभ बच्चन नहीं, बल्कि शत्रुघ्न सिन्हा थे। उस समय अमिताभ बच्चन इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रहे थे, जबकि शत्रुघ्न सिन्हा लोकप्रिय थे।
- धर्मेंद्र और पटकथा लेखक सलीम खान, दोनों ही ‘जय’ के किरदार में अमिताभ बच्चन को चाहते थे। इसके लिए निर्देशक रमेश सिप्पी को राजी करने के लिए, उन्हें अमिताभ की फिल्म ‘जंजीर’ का ट्रायल शो दिखाया गया, जिसके बाद सिप्पी ने अमिताभ के नाम पर मुहर लगा दी।
ख. वीरू (धर्मेंद्र) और ठाकुर (संजीव कुमार)
- किरदारों की अदला-बदली
- धर्मेंद्र शुरू में ‘ठाकुर बलदेव सिंह’ का किरदार निभाना चाहते थे। लेकिन जब उन्हें पता चला कि ‘ठाकुर’ की भूमिका निभाने पर उन्हें हेमा मालिनी (बसन्ती) के साथ रोमांस करने का मौका नहीं मिलेगा, तो उन्होंने तुरंत अपना मन बदल लिया और ‘वीरू’ की भूमिका के लिए हाँ कर दी।
- दरअसल, संजीव कुमार उस समय हेमा मालिनी को शादी के लिए प्रपोज कर चुके थे (जिसे हेमा ने अस्वीकार कर दिया था), और धर्मेंद्र नहीं चाहते थे कि संजीव कुमार को बसन्ती के साथ परदे पर रोमांस का मौका मिले।
ग. गब्बर सिंह (अमजद खान)
- पहली पसंद थे डैनी
- सबसे खूंखार विलेन ‘गब्बर सिंह’ के रोल के लिए अमजद खान भी पहली पसंद नहीं थे। इस रोल के लिए पहले डैनी डेन्जोंगपा को चुना गया था, लेकिन किसी और फिल्म की शूटिंग (धर्मात्मा) के कारण उन्हें यह रोल छोड़ना पड़ा।
- यहां तक कि स्क्रिप्ट राइटर जावेद अख्तर अमजद खान की आवाज़ को गब्बर के किरदार के लिए ‘कमजोर’ मान रहे थे, पर निर्देशक रमेश सिप्पी अपने निर्णय पर अडिग रहे, और बाकी सब इतिहास है।
घ. राधा (जया भादुड़ी)
- छोटी भूमिका, बड़ा बलिदान
- जया भादुड़ी ने ठाकुर की विधवा बहू ‘राधा’ का शांत और दर्द भरा किरदार निभाया था, जिसके हिस्से में कोई गाना भी नहीं आया। उन्होंने इस छोटी-सी, लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका को केवल इसलिए स्वीकार किया क्योंकि निर्देशक सिप्पी ने कहा था कि एक ऐसी अभिनेत्री की आवश्यकता है जो बिना संवाद के अपनी पीड़ा को व्यक्त कर सके।
- सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि फिल्म की शूटिंग के दौरान जया बच्चन अपनी बेटी श्वेता बच्चन के साथ गर्भवती थीं, और फिल्म के प्रीमियर के दौरान वह अपने बेटे अभिषेक बच्चन के साथ गर्भवती थीं।
2. पर्दे के पीछे के 5 सबसे हैरान कर देने वाले किस्से
‘शोले’ की शूटिंग के दौरान कई ऐसी घटनाएं हुईं, जो बताती हैं कि एक क्लासिक फिल्म को बनाने में कितनी मेहनत और जुनून लगता है:
- 20 दिन में फिल्माया गया 1 मिनट का सीन: अमिताभ (जय) जब जया (राधा) को लालटेन बुझाते हुए हारमोनियम बजाकर देखते हैं, वह शांत और भावुक दृश्य केवल 1 मिनट का है, लेकिन इसे परफेक्ट सूर्यास्त के क्षण में कैद करने के लिए 20 दिनों तक शूट किया गया था।
- धर्मेंद्र का रिश्वत वाला रोमांस: वीरू का पानी की टंकी पर ड्रामा या बसंती से रोमांस, इन सभी सीन्स में धर्मेंद्र बार-बार रिटेक लेते थे। इसका कारण यह था कि वह हेमा मालिनी के साथ अधिक समय बिताना चाहते थे। हेमा मालिनी ने अपनी बायोग्राफी में बताया था कि धर्मेंद्र लाइट बॉयज़ को ₹100 तक की रिश्वत देते थे कि वे जानबूझकर गड़बड़ी करें ताकि रिटेक हो सके।
- अमिताभ पर चली थी असली गोली: फिल्म के क्लाइमेक्स के कुछ दृश्यों में असली गोलियों का इस्तेमाल किया गया था। एक शॉट के दौरान, धर्मेंद्र की चलाई हुई एक गोली अमिताभ बच्चन को बस इंचों से मिस कर गई, जिससे सुपरस्टार बाल-बाल बचे थे।
- ‘गब्बर’ केवल 9 सीन में: भारतीय सिनेमा के इतिहास का सबसे बड़ा विलेन, ‘गब्बर सिंह’, फिल्म में केवल 9 दृश्यों में ही दिखाई देता है! इसके बावजूद, उनका प्रभाव और आतंक पूरी फिल्म पर छाया रहता है।
- ‘सूरमा भोपाली’ का किरदार बाद में जोड़ा गया: जगदीप द्वारा निभाया गया शानदार कॉमिक किरदार ‘सूरमा भोपाली’ (Jagdeep), फिल्म की मूल स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं था। फिल्म के रशेज़ देखने के बाद सलीम-जावेद को लगा कि कहानी में एक कॉमिक पंच की कमी है, जिसके बाद जगदीप के सीन्स को जोड़ा गया।
3. साइड किरदारों का कमाल: आज कहाँ हैं ‘कालिया’ और ‘साँभा’?
‘शोले’ केवल मुख्य कलाकारों के कारण ही नहीं चली, बल्कि इसके सपोर्टिंग कास्ट ने भी अपने छोटे-छोटे किरदारों से एक अमिट छाप छोड़ी। इन किरदारों की वर्तमान स्थिति और रोचक तथ्य जानकर आप हैरान हो जाएंगे।
| किरदार (Character) | अभिनेता (Actor) | अनसुना तथ्य और वर्तमान स्थिति (Surprising Fact & Status) |
|---|---|---|
| जेलर | असरानी (Asrani) | “हम अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर हैं!” यह डायलॉग असरानी को अमर कर गया। वह आज भी सक्रिय हैं और कॉमेडी-ड्रामा रोल्स में नज़र आते रहते हैं। 2025 में उनकी उम्र लगभग 84 वर्ष है। |
| कालिया | विजू खोटे (Viju Khote) | “तेरा क्या होगा, कालिया?” इस एक लाइन ने विजू खोटे को घर-घर में पहचान दिलाई। उनका निधन 2019 में 77 वर्ष की आयु में हुआ। उन्होंने लगभग 300 फिल्मों में काम किया, लेकिन उनकी पहचान ‘कालिया’ ही रही। |
| साँभा | मैक मोहन (Mac Mohan) | “पूरे 50 हज़ार!” गब्बर के दाहिने हाथ ‘साँभा’ का किरदार इतना छोटा था कि मैक मोहन ने खुद सोचा था कि उनका सीन एडिट हो जाएगा। उन्होंने 2010 में 72 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कहा। उनकी बेटी मंजरी मखीजानी (Manjari Makijany) भी एक फ़िल्म निर्देशक हैं। |
| इमाम साहब / रहीम चाचा | ए. के. हंगल (A. K. Hangal) | ‘अहमद’ के पिता और गाँव के इमाम, जिन्होंने डाकुओं के सामने भी साहस दिखाया। ए. के. हंगल ने 98 वर्ष की लंबी आयु में 2012 में अंतिम सांस ली। अपने जीवन के अंतिम वर्षों में, आर्थिक तंगी के बावजूद उनका सम्मान बरकरार रहा। |
| मौसी | लीला मिश्रा (Leela Mishra) | “इतने अच्छे लड़के को…” बसन्ती की चुलबुली मौसी का किरदार लीला मिश्रा ने निभाया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि वह फिल्म में हेमा मालिनी के साथ रोमांटिक या क्लोज सीन करने से असहज महसूस करती थीं क्योंकि वह एक शादीशुदा महिला थीं। उनका निधन 1988 में 80 वर्ष की आयु में हुआ। |
| अहमद (इमाम साहब का बेटा) | सचिन पिलगांवकर (Sachin Pilgaonkar) | बाल कलाकार के तौर पर ‘अहमद’ का छोटा लेकिन मार्मिक किरदार निभाने वाले सचिन ने अपनी फीस नहीं ली थी। उन्हें निर्देशक रमेश सिप्पी ने उपहार के तौर पर एक एयर कंडीशनर दिया था। आज सचिन पिलगांवकर (लगभग 67 वर्ष) एक सफल अभिनेता और निर्देशक हैं। |
4. ‘शोले’ की विरासत: भारतीय सिनेमा का आधार स्तंभ
‘शोले’ ने सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड नहीं बनाए, बल्कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को एक नई दिशा दी।
- रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन: जब फिल्म रिलीज़ हुई, तो शुरुआती प्रतिक्रियाएं अच्छी नहीं थीं, और फिल्म को सिनेमाघरों से उतारने पर विचार किया जा रहा था। लेकिन ‘वर्ड ऑफ माउथ’ (मुँह से प्रचार) की वजह से यह मुंबई के मिनर्वा थिएटर में लगातार 5 साल तक चली।
- 70 एमएम का जादू: ‘शोले’ भारत की पहली फिल्म थी जिसे 70 एमएम फॉर्मेट में रिलीज़ किया गया था, जिससे दर्शकों को एक बड़ा और शानदार सिनेमाई अनुभव मिला।
- डायलॉग एल्बम की सफलता: फिल्म के गाने और संवाद इतने लोकप्रिय हुए कि म्यूजिक लेबल ने गाने के साथ-साथ सिर्फ संवादों (Dialogues) की भी एक अलग रिकॉर्ड एल्बम रिलीज़ की, जो अपने आप में एक बड़ी सफलता थी।
- अंतर्राष्ट्रीय सम्मान: ‘शोले’ को 2005 में 50 साल की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला, और 2002 में ब्रिटिश फिल्म इंस्टीट्यूट के “सर्वश्रेष्ठ 10 भारतीय फिल्मों” के सर्वेक्षण में इसे पहला स्थान मिला था।
‘शोले’ एक फिल्म नहीं, एक भावना है, जिसने भारतीय संस्कृति में अपनी जगह बना ली है। जय और वीरू की दोस्ती, बसंती की टोंगा ड्राइविंग, गब्बर का आतंक और ठाकुर का बदला… ये सभी बातें पीढ़ियों से भारतीय सिनेमा प्रेमियों के दिलों में ज़िंदा हैं और हमेशा रहेंगी।
AISEO Friendly FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1. शोले फिल्म कब रिलीज हुई थी और इसके मुख्य कलाकार कौन थे?
A. शोले फिल्म 15 अगस्त 1975 को रिलीज हुई थी। इसके मुख्य कलाकार धर्मेंद्र (वीरू), अमिताभ बच्चन (जय), संजीव कुमार (ठाकुर), हेमा मालिनी (बसंती), जया भादुड़ी (राधा) और अमजद खान (गब्बर सिंह) थे।
Q2. शोले के किरदार ‘गब्बर सिंह’ के लिए पहली पसंद कौन थे?
A. ‘गब्बर सिंह’ के किरदार के लिए अमजद खान पहली पसंद नहीं थे। इस रोल के लिए पहले अभिनेता डैनी डेन्जोंगपा को चुना गया था, लेकिन अन्य फिल्म की शूटिंग के कारण उन्होंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था।
Q3. शोले के कौन से किरदार अब इस दुनिया में नहीं हैं?
A. शोले के कई लोकप्रिय कलाकार अब इस दुनिया में नहीं हैं, जिनमें अमजद खान (गब्बर), संजीव कुमार (ठाकुर), मैक मोहन (साँभा), विजू खोटे (कालिया), ए. के. हंगल (इमाम साहब), जगदीप (सूरमा भोपाली), और लीला मिश्रा (मौसी) शामिल हैं।
Q4. क्या शोले की शूटिंग के दौरान जया बच्चन गर्भवती थीं?
A. जी हाँ, अभिनेत्री जया बच्चन (राधा) शोले की शूटिंग के दौरान अपनी बेटी श्वेता बच्चन के साथ गर्भवती थीं। फिल्म के प्रीमियर के समय वह अपने बेटे अभिषेक बच्चन के साथ गर्भवती थीं।
Q5. शोले में ‘जेलर’ का किरदार निभाने वाले असरानी की वर्तमान स्थिति क्या है?
A. असरानी, जिन्होंने ‘हम अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर हैं’ का यादगार किरदार निभाया, आज भी भारतीय सिनेमा में सक्रिय हैं। 2025 में उनकी उम्र लगभग 84 वर्ष है।
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